January 23, 2021

SC ने PM मोदी के वाराणसी से निर्वाचन के खिलाफ दायर BSF के पूर्व जवान की याचिका खारिज की


BSF के पूर्व जवान तेज बहादुर को सुप्रीम कोर्ट से झटका (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के वाराणसी (Varanasi) से निर्वाचन के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को खारिज कर दिया. BSF के पूर्व जवान तेज बहादुर द्वारा दाखिल अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने यह फैसला दिया. इससे पहले, 17 नवंबर को अदालत ने इस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. 

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तेज बहादुर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट का मानना था कि तेज बहादुर न तो वाराणसी के वोटर हैं और न ही प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उम्मीदवार थे. इस आधार पर उसका इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने का कोई औचित्य नहीं बनता. शीर्ष अदालत ने तेज बहादुर के वकील के सुनवाई को स्थगित करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया.

पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री कार्यालय अनूठा कार्यालय है और इसके खिलाफ याचिका को अनिश्चितकाल के लिए लंबित नहीं रखा जा सकता. अदालत ने टिप्पणी की थी कि तेज बहादुर का नामांकन उचित तरीके से खारिज किया गया था या अनुचित तरीके से, यह उनकी पात्रता पर निर्भर करता है.

CJI एस ए बोबडे ने तेज बहादुर के वकील से कहा था कि हमें आपको स्थगन की छूट क्यों देनी चाहिए. आप न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं. आप बहस कर रहे हैं. वकील ने दलील दी कि बहादुर ने पहले एक निर्दलीय उम्मीदवार और बाद में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र दायर किया था.

बता दें कि तेज बहादुर ने सैन्य बलों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करते हुए एक वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया था, जिसके बाद उन्हें 2017 में बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था.

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पिछले साल दिसंबर में पीएम मोदी के वाराणसी लोकसभा सीट से निर्वाचन को चुनौती देने वाली बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर की चुनाव याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. कोर्ट ने माना कि याचिका विचार करने योग्य ही नहीं है. जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने अपने 58 पेज के फैसले में कहा कि याची तेज बहादुर न ही वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के मतदाता हैं और न ही वे वाराणसी सीट से उम्मीदवार हैं, इसलिए उन्हें चुनाव याचिका दाखिल करने का कोई अधिकार नहीं है.

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